उस सरहद को कोई छू नहीं सकता जिस सरहद की निगहबान है आंखें
जी हां ऐसा ही कुछ सच होने वाला है की भारत सरहद पर। आज के आधुनिक युग मे भारत एक इतिहास रचने वाला है। हम बात कर रहे हैं भारत की इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन #ISRO की जी हां अगस्त 2021 में ही ISRO 1 सैटलाइट लॉन्च करने वाला है, जो कि धरती से 36000 किलोमीटर ऊपर जाकर भारत – पाक – चीन के सरहदी छेत्रों पर निगाह रखेगा और सरहदी क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की तुरंत सूचना देगा। सूत्रों के अनुसार यह सेटेलाइट आज ही लॉन्च किया जाएगा। मौसम के भाव स्वभाओं को देखते हुए आज सेटेलाइट को लांच कर भारत एक नया इतिहास रचने जा रहा है।
इस सैटेलाइट का नाम आई इन द स्काई मतलब आकाश में आंख रखा गया है। कोरोना महामारी के कारण के सेटेलाइट का प्रोजेक्ट पिछले कुछ महीनों से रोक दिया गया था लेकिन बाद में फिर से तैयारी कर अब इसरो के वैज्ञानिकों ने यह कर दिखाया है। अब वह दिन आ गया है जब भारत अपनी आंख आकाश में रखने जा रहा है। इस सेटेलाइट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लांच पैड से जियो सैटलाइट लॉन्च व्हीकल एक्ट एंड जीएसएलवी से 12 अगस्त की सुबह 5:43 पर लांच किया जाएगा। लांच मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसके जरिए भारत के साथ चीन पाकिस्तान की सीमाओं पर नजर रखी जाए सकेगी। अंतरिक्ष विभाग के राष्ट्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में राज्यसभा में बताया था कि यह सेटेलाइट पूरे देश को रोज 4 से 5 तस्वीरें भेजेगा। इस सेटेलाइट की मदद से सरहद ही नहीं बल्कि जलाशय बाढ़ नेचुरल डिजास्टर और भी कई परिस्थितियों का अनुमान लगाया जा सकता है।
इससे जंगल जलाशय और धरातल पर होने वाले बदलाव पर भी पैनी नजर रखी जा सकेगी। इस सेटेलाइट की खास बात यह है कि यह पृथ्वी की गति के अनुसार ही घूमेगा जिससे कि यह देखने में एक ही जगह पर स्थिर लगेगा। इस सेटेलाइट का कोड नेम ओ एस -03 दिया गया है । कोरोना महामारी के बाद इसरो का यह पहला बड़ा लांच है । इसलिए यह ISRO के लिए काफी महत्वपूर्ण भी है। पहले इसे 28 मार्च को लॉन्च करना था परंतु कुछ तकनीकी गड़बड़ी के चलते इसमें देरी हो गई। इस सफलता के बाद इसरो थम कर बैठने वाला नहीं है। इसके बाद भी इसरो ने अपनी कई तैयारी करके रखी है जैसे कि हम बात करें अगले 5 महीने में चार और बड़े लॉन्च करने वाला है। सितंबर में इसरो सिंथेटिक रडार इमेज सेटेलाइट स्पेस में भेजेगा। यह दिन-रात बादलों के पार की तस्वीरें भी कैप्चर करके भेज सकेगा । इस सेटेलाईट का वजन लगभग 1800 किलो होगा और यह दिन रात किसी भी मौसम में रीयल टाइम तस्वीरें खींचकर भेजने में सक्षम है । इसके बाद भारत में पहली बार गगनयान मिशन भी दिसंबर में संपूर्ण में होने जा रहा है। इसरो ने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है । जिसमें भारतीय वायुसेना के चार ट्रेंड अफसर पहली बार अकाश गंगा में गोते लगाएंगे । बता दें कि इसमें कुल खर्च 10,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो कि 2018 में आंका गया था।
लाइव भारत के लिए कैलाश प्रजापति खास रिसर्च रिपोर्ट